सुप्रीम कोर्ट ने जिम कॉर्बेट को नष्ट करने के लिए पूर्व मंत्री को लगाई फटकार, कहा- खुद को कानून मान बैठे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब से उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी सिर्फ बफर जोन में की जा सकती है। नेशनल पार्क के मुख्य क्षेत्र में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park) में टाइगर सफारी को लेकर एक बड़ा फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब से उत्तराखंड (Uttarakhand) के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में टाइगर सफारी सिर्फ बफर जोन में की जा सकती है। नेशनल पार्क के मुख्य क्षेत्र में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है।
आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान को नष्ट करने के लिए उत्तराखंड के पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत और प्रभागीय वन अधिकारी किशन चंद को भी जमकर फटकार लगाई।
कोर्ट ने कहा,' यह मामला सांठगांठ का'
कोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा मसला है जो साफ़-साफ़ दिखाता है कि कैसे एक राजनेता या पूर्व वन मंत्री और वन अधिकारी के बीच सांठगांठ के कारण मात्र राजनीतिक और व्यावसायिक लाभ के लिए पर्यावरण को कितना भारी नुकसान हुआ है। कोर्ट ने आगे कहा कि दोनों अधकारी ने खुद को कानून मान लिया था। उन्होंने साथ में सांठगांठ कर उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में काफी ज्यादा संख्या में पेड़ कटवा दिए थे।
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'दोषी अधिकारियों के खिलाफ शुरू हो कार्यवाही'
इस सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने किशन चंद और वन मंत्री हरक सिंह रावत पर सख्त रवैया दिखाया। कोर्ट ने कहा कि किशन चंद पर कई संगीन आरोप होने के बावजूद भी पूर्व वन मंत्री हरक सिंह रावत ने उन्हें डीएफओ नियुक्त करवाया था। यह पूरा मसला राजनेता और वन अधिकारी के बीच सांठगांठ का है। कोर्ट ने कहा यह मामला अभी सीबीआई द्वारा लंबित है, इसीलिए हम इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं करते है। इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को अपनी जांच जल्द से जल्द पूर्ण करने को कहा गया और सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने को कहा गया है।
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